Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verses 12–13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, verses 12–13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 12,13
संस्कृत श्लोक
तत्र कस्मिंश्चिदुदिते सानौ सरलपादपे ।
आगुल्फाकीर्णकुसुमे स्निग्धच्छायमहाद्रुमे ॥ १२ ॥
उद्दालको नाम मुनिर्मौनी मानी महामतिः ।
अप्राप्तयौवनः पूर्वमुवासोद्दामतापसः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
उस गन्धमादन पर्वत के भूमि भाग पर किसी एक उठे
हुए शिखर पर, जिसमें सीधे वृक्ष हैं, टखनों तक फूल बिखरे रहते हैं और घनी ठण्डी छायावाले महावृक्ष
हैं वहाँ पहले उद्दालक नाम के एक मौनी मुनि रहते थे । वे यत्न से मैं अवश्य पुरुषार्थ का साधन करूँगा
ऐसा अभिमान रखते थे और शास्त्र, अनुमान आदि प्रमाण में कुशल थे। उनका मन महा उदार था और
वे बड़े तपस्वी थे। अभी उन्हें युवावस्था प्राप्त नहीं हुई थी