Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 59
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, verse 59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
जरामरणदुःखेन व्यर्थमुन्नतिमीयुषा ।
दोषाशीविषकोशेन चेतो गच्छति पीनताम् ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
जरा-मरणरूपी दुःख से पूर्ण, व्यर्थ ही दिन-पर-दिन बढ़े हुए दोषरूपी साँपों के विषरूप पूर्वोक्त “इदं
मम“ इस भाव से चित्त स्थूलता को प्राप्त होता हे