Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 52
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, verse 52 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
धराविवरकीटेभ्यो गर्दभेभ्योऽपि मानवः ।
तिर्यग्भ्यश्चाप्यतत्त्वज्ञा राम तुच्छतराः स्मृताः ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, जिन लोगों को तत्त्वज्ञान नहीं हुआ वे पृथिवी के बिलों मे रहनेवाले कीड़ों से,
गदहों से और पशु-पक्षियों से भी गये गुजरे कहे गये हैं । तत्त्वज्ञान का अभाव होने पर उससे भी अधम
करोड़ों योनियों की प्राप्ति होती है, यह भाव है