Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
वर्तमानमनायासं भजद्वाह्यधिया क्षणम् ।
भूतं भविष्यदभजद्याति चित्तमचित्तताम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्त के नाश का क्या उपाय है 2 इस पर कहते है ।
बाह्य बुद्धि से वर्तमान क्षण का अनायास भजन कर रहा ओर भूत तथा भविष्यत् का भजन न कर
रहा चित्त अचित्तता को प्राप्त होता हे । भूत, भविष्यत् विषयों के अनुसन्धान के त्याग से ही क्रमशः
चित्त का क्षय होता है, यह अर्थ हे