Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
विश्वातीतपदं प्राप्तः प्राप्तप्राप्तव्यपूरितः ।
पूर्णार्णववदक्षुब्धो विज्वरो भव राघव ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, आप संसारातीत पद को प्राप्त हुए, प्राप्तव्य वस्तु के प्राप्त होने से परिपूर्ण, पूर्ण
सागर के समान क्षोभरहित ओर सन्ताप शून्य होइये