Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
श्रीभगवानुवाच ।
काकतालीययोगेन चेतसि श्वपचस्थितिः ।
सर्वेषां भूतकीराणां तवेव प्रतिबिम्बति ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
मायिक पदार्थ भी जनप्रवादो में अव्यभिचरित हो सकते हैं, इसमें उपत्ति कहते हैं।
श्री भगवान् ने कहा : गाधे, काकतालीय न्याय से प्रसिद्ध भूतमण्डल देश के और कीरदेश के
लोगों के मन में, तुम्हारे मन की नाई, कटंज चाण्डाल की स्थिति अपरोक्ष रूप से भ्रान्तिवश
प्रतिबिम्बित है