Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
गाधिरुवाच ।
भ्रान्तोऽस्मि देव षण्मासान्भूतकीरजनास्पदम् ।
तत्र व्यभिचरत्यस्मद्वृत्तान्तो न कथास्वपि ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
गाधि ने कहा : हे देवदेव, मैंने छः महीने तक भूमण्डल ओर कीरराज्यमें भ्रमण किया | वहाँ पर
जनप्रवादो में भी मेरे वृत्तान्त में व्यभिचार नहीं आया यानी वह ज्यो -का-त्यो सुना गया