Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
अरमत तदनु स्वां प्राप्य सत्तां महात्मा ह्यपगतभयशोको भोगभूमावनीषु ।
सततमुदितजीवन्मुक्तरूपः प्रशान्तः सकल इव शशाङ्को घूर्णितापूर्णचेताः ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मज्ञान
प्राप्ति के उपरान्त महात्मा गाधि अपनी पारमार्थिक सत्ता प्राप्त कर भय-शोक रहित हो तथा निरन्तर
उदित जीवनमुक्त स्वरूपवाले अतएव अपरिच्छिन्न स्वानन्द मद से आघूर्णित ओर पूर्ण चित्तवाले हो
षोडश कलाओं से पूर्ण चन्द्रमा के समान अपरिच्छिन्न ब्रह्माकाश में विहार करने लगे