Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verses 28–29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, verses 28–29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 28,29
संस्कृत श्लोक
योऽसौ कटंजको नाम श्वपचो भूतमण्डले ।
तेनैव संनिवेशेन स तथैवाभवत्पुरा ॥ २८ ॥
तथैव विकलत्रत्वं प्राप्य देशान्तरं गतः ।
बभूव कीरनृपतिः प्रविवेशानलं ततः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
जो यह
कटंज नाम का चाण्डाल भूतमण्डल में पहले हुआ, वह तुम्हारे द्वारा देखे गये उसी आकार-प्रकार से
वैसे ही युक्त पहले हुआ । वैसे ही कलत्र रहित होकर दूसरे देश मे गया, कीरदेश का अधिपति हुआ और
तदनन्तर अग्नि में प्रवेश कर गया