Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
स्वव्यापारपरो भूत्वा धियात्मानं विचारय ।
साधो गतमनोमोहमिहैवास्व व्रजाम्यहम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
तव मुझे क्या करना चाहिये ? यह पूछने पर कहते है ।
हे साधो, स्वव्यापार में तत्पर होकर यानी अपने वर्ण ओर आश्रम के आचरण में तत्पर होकर आप
बुद्धि से अपने आत्मा का विचार कीजिये तथा मोहरहित होकर यहीं रहिये, मैं जाता हूँ