Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
कदाचित्प्रतिभैकैव बहूनामपि जायते ।
काकोलतालस्थितिवद्विचित्रा हि मनोगतिः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
कभी भ्रान्ति रूप प्रतिभास बहुतों का भी एक-सा ही होता है।
कौए की ताड के पेड़ के नीचे स्थिति के समान मनोगति बड़ी विचित्र है