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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 35

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

तदिदानीं तथा यत्नं करिष्ये गिरिकन्दरे । यथाकुसंभ्रमस्यास्य जाने जन्म तथा स्थितिम् ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

हा ! बड़े खेद की बात है, अप्रबुद्ध और वासना से नष्ट हुआ मेरा मन नन्हे से बालक के मन की नाई विस्तृत विविध भ्रमों को देखता है ॥३ ३॥ यह बड़ी माया पहले तपस्या से प्रसन्न किये गये विष्णु भगवान्‌ ने भली-भाँति मुझे दिखाई है। अब मुझे अच्छी तरह सारा वृतान्त का स्मरण हो गया है ॥ ३ ४॥ इसलिए अब पर्वत की गुफा में जाकर ऐसा यत्न करूँगा, जिससे इस मिथ्या ज्ञान की उत्पत्ति के निमित्त का ओर इसकी स्थिति के निमित्त का मुझे ज्ञान हो जाय