Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verses 17–18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verses 17–18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 17,18
संस्कृत श्लोक
अथात्मनानुभूतानि दृष्टान्यासेवितानि च ।
स्थानानि नगरे पश्यन्पप्रच्छ जनमादृतः ॥ १७ ॥
साधो स्मरसि किंचित्त्वमिह श्वपचमीश्वरम् ।
यदि जानासि तत्त्वं मे वर्णयाशु यथाविधि ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके बाद अपने उपभोग में
आये हुए अपने महल, देखे हुए दूसरों के मकान और पूर्व में अपने आनन्द के साधनभूत बाग बगीचों को
और नगर के बहुत से स्थानों को देखते हुए गाधि नागरिक लोगों से पूछने लगे : हे सज्जनों, क्या आप
लोगों को स्मरण है कि यहाँ का राजा चाण्डाल था, यदि आप जानते हैं, तो इस विषय विधिपूर्वक शीघ्र
वर्णन कीजिये