Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
समुल्लङ्घ्य नदीशैलमण्डलारण्यसंततिम् ।
आससाद तुषाराद्रिरत्नं किल जनास्पदम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर बहुत-सी नदियों, पर्वतों, देशों तथा
जंगलों का उल्लँघन करके हिमालय पर्वत के मध्य में रत्न के समान श्रेष्ठ पूर्वदृष्ट कीर देश में पहुँचे