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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । एवंप्रायाः स्मरन्गाधिः प्राक्तनीः श्वपचक्रियाः । विस्मयोत्कम्पितशिरा धातुश्चेष्टां परामृशत् ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, इस तरह की पहिले हुई चाण्डालों की क्रियाओं का (कुकर्मों का) स्मरण करते हुए गाधि, जिनका सिर आश्चर्य से कौप रहा था, विधाता की विचित्र लीलाओं का विचार करने लगे