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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

अत्र सार्धं कुटुम्बेन जन्यत्रेषु कुटुम्बिना । नृत्तं तत्कृतमुन्नादं कल्लोलैर्जलधाविव ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

यहाँ पर विवाहों में अपने सब कुटुम्ब के साथ कुटुम्बवाले मैंने जैसे सागरमें कललोल ध्वनिपूर्वक नृत्य करते हैं वैसे ही उत्कृष्ट ध्वनिवाला नृत्य किया था