Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
ददर्श तस्य पर्यन्ते तमेव श्वपचालयम् ।
अधस्ताद्भूवनस्येव पाताले नरकव्रजम् ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
फिर वहाँ पर बुद्धि में स्थित (स्मृति पथ में आरूढ हो रहे) अवयव संनिवेश से
(आकार प्रकार से) गन्धर्व नगर के तुल्य किसी एक गाँव को उन्होने देखा ॥ ४ १॥ उस गाँव के छोर पर
गाधि ने भुवन के नीचे पाताल में नरक मण्डल के समान उसी चाण्डाल गृह को देखा