Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
सर्वमध्यवसायेन दुष्प्रापमपि लभ्यते ।
पश्यन्गाधिर्जगन्मायां प्रमेयीकर्तुमुद्यतः ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
उद्योग से दुष्प्राप्त भी सब कुछ प्राप्त होता है देखिये, न जगन्माया को
स्वप्न में देख रहे गाधि उसे नेत्रगोचर करने को तत्पर हुए