Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
तत्राहमवसं मासं पूज्यमानः पुरे जनैः ।
नानात्मस्वादलोलात्मा चित्तवेतालमोहितः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
उसमें पुरवासी लोगों से सन्मानित हो रहा और विविध
प्रकार के आत्मा को अच्छे लगनेवाले भोगों में तृष्णायुक्त और चित्तरूपी वेताल से मोहित मैं एक मास
रहा