Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
ततः प्रावर्तते शान्ता तयोस्तापसयोः कथा ।
स्वव्यापारोचिता पुष्पश्रीरिवर्तुत्वमाशयोः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर उन दोनों तपस्वियों की अपने तप, ध्यान आदिकर्मो
के अनुरूप शान्तरस प्रधान कथा एसी ही प्रवृत्त हुई जैसे किं भगवान् सूर्य का उत्तर दिशा से सम्बन्ध
होने पर वसन्त में वसन्त ऋतु के अनुरूप पुष्पशोभा प्रवृत्त होती है