Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
तदास्तामेतदेषा हि बन्धुमध्ये मृतस्थितिः ।
मायामोहे मनागस्मिन्न सत्यमुपलभ्यते ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वप्न के समान बाध होने के कारण उसकी असत्यता का निश्चय कर उसकी उपेक्षा करते हैं।
यह बन्धुओं के बीच में मृत स्थिति रहे इस मायाजनित मोह में यह कुछ भी सत्य दृष्टिगोचर नहीं
होता