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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 12

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

अतिदूरतरीभूताः स्वदेशस्य स्वबान्धवाः । के नाम मम येषां ते मध्ये जीवं त्यजाम्यहम् ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

मेरे जन्मभूमि के अमात्य बन्धु-बान्धव मुझसे बहुत दूर है, जिनके बीच में मेने प्राण त्यागे थे, वे न न मालूम कौन थे ?