Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 45
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, verse 45 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
तस्मिन्बलाद्गवलनाम्नि हुताशराशौ देहे पतत्यवयवाकुलतां प्रयाते ।
स्वाङ्गावदाहदहनस्फुरणानुरोधादन्तर्जले झटिति बोधमवाप गाधिः ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
गवल नामक उस देह के निर्वेदवश अग्नि में गिरने और
अवयवों से व्याकुल होने पर अपने अंगों के दाहवश हिलने-डुलने के कारण जल के अन्दर अघमर्षण
कर रहे गाधि तुरन्त बोध को प्राप्त हुए