Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verses 32–33
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, verses 32–33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
ज्वलितास्वभितस्तासु तारकास्विव खे तदा ।
बभूव नगरं सर्वमाक्रन्दपरमानवम् ॥ ३२ ॥
करुणारावमुखरैः कलत्रैर्बाष्पवर्षिभिः ।
अवष्टब्धं ज्वलत्कुण्डोपान्तमन्दरुदत्प्रजम् ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
तब आकाश में तारों के समान चारों ओर उसमें चिताओं के
प्रज्वलित होने पर सारे नगर के लोग विलाप करने लगे