Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verses 22–23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, verses 22–23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
मन्त्रिणो नागरा नार्यस्ततस्ते तं महीपतिम् ।
नास्प्राक्षुरपि तिष्ठन्तं गृह एव शवं यथा ॥ २२ ॥
भृत्याश्चाकृतसत्कारं दूर एनमथात्यजन् ।
दुःखयुक्ता घनस्नेहा अपि बालाः शवं यथा ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर उन मन्त्री, नगरवासी और नारियों ने जैसे घर में ही स्थित शव का लोग स्पर्श
नहीं करते वैसे ही उसका स्पर्श नहीं किया