Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
एकस्तस्मात्समुत्तस्थौ जरावान्रक्तलोचनः ।
काचश्रृङ्गहिमापूर्णमिव श्वपचनायकः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
उनमें
से एक बूढ़ा चाण्डालो का नेता उठा जिसके लालनेत्र थे ओर जो हिमसे आच्छन्न पर्वत के काँचमय श्रृंग
के समान वृद्धावस्था से सफेद हुए केशों से आच्छन्न काले शरीर का था