Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verses 8–9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, verses 8–9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 8,9
संस्कृत श्लोक
तमाललतयेवाथ श्रितं श्वपचकान्तया ।
स्तनस्तबकशालिन्या नवपल्लवहस्तया ॥ ८ ॥
श्यामया मलिनाकारदशनामलमालया ।
वनपल्लवया भूरिविलासवलिताङ्गया ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर तमाल की लता के समान चाण्डाल कन्या से उसने विवाह कर लिया था। वह स्तनरूप
स्तवकां से सुशोभित थी, नूतन पल्लव के समान उसके हाथ थे । दाँत साफ न करने के कारण मलिन
ओर स्वाभाविक शुक्लता के कारण निर्मल उसकी दन्तपंक्ति थी और वह स्वयं श्याम थी। नव पल्लवं
का अनुकरण करनेवाले बहुत से विलासो से उसके अंग पूर्ण थे