Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
शनैः पक्वतया काले प्रसूतं मेचकच्छविम् ।
श्वपच्या प्रावृषेवाब्दं श्याममावलितं मलैः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
क्रमश: परिपक्व होने के कारण जैसे वर्षा ऋतु काले मेच
को समय पर पैदा करती हे वैसे ही समय पर चाण्डाली से उत्पन्न किया गया वह काली कान्तिवाला
तथा मलमूत्र आदि से वेष्टित था