Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
मानिन्यस्तं गुणप्रोतैर्नानारत्नैरपूरयन् ।
नानाप्रभाप्रभातार्का वेला इव तटाचलम् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वेलाएँ, जिनमें सूर्य नाना प्रकार के मणियों में प्रतिबिम्बित होने के कारण
तत्-तत् प्रभाओं से सुशोभित रहता है, अपने तटवर्ती पर्वत को पूरित करती हैं वैसे ही उन्होने सूत्रों में
गुँथे हुए रत्नों से उसे परिपूर्ण किया