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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

मृते राजनि राजार्थं विहरन्तमितस्ततः । रत्नज्ञमिव रत्नार्थं चिन्तामणिदिदृक्षया ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे रत्न परीक्षा में कुशल पुरुष चिन्तामणि को देखने की इच्छा से रत्न के लिए विहार करे वैसे ही राजा के मरने पर राजा के लिए वह इधर-उधर विहार कर रहा था