Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
विजहार बहून्देशाननास्थश्चिन्तयान्वितः ।
प्रेर्यमाण इवान्येन वातनुन्न इवाम्बुदः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
अवलम्बनरहित ओर
शोकपीडित वह किसी दूसरे के द्वारा प्रेरित हो रहे की नाई वायु से उडाये गये बादल की भाँति बहुत
देशों मेँ भटकता फिरा