Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
लुलितं पुष्पशय्यासु भ्रान्तमद्रितटीषु च ।
तज्ज्ञं काननकोशेषु बहुज्ञं मृगमारणे ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
फूलों की सेजों पर लेटा रहता था, पर्वत के तटों
पर घूमता था, वनों के विषय में असाधारण ज्ञान रखता था ओर मृगो का शिकार करने में पण्डित
था