Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

वनपर्णलतापत्रे वसन्तं व्यसनातुरम् । विन्ध्यकान्तारमाकारमभ्यागतमिवोद्भटम् ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

वन की पर्णलताओं के (ताम्बूल लताओं के) पत्ते मे निवास कर रहा व्यसनं से आतुर वह पुरुष का आकार धारण किये हुए विन्ध्याचल के समान भीषण था