Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
अथास्य कतिचित्तस्मिन्दिवसा निर्ययुर्वने ।
हरिसंदर्शनानन्दवतो ब्राह्मणकर्मणा ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर हरि भगवान् के दर्शन से आनन्द में मग्न हुए उसके वन में कितने ही
दिन ब्राह्मणोचित तप, स्वाध्याय, अतिथि पूजा आदि से व्यतीत हुए