Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इमां द्रक्ष्यसि मायां त्वं ततस्त्यक्ष्यसि चेत्यजः ।
उक्त्वा ययावदृश्यत्वं गान्धर्वमिव पत्तनम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे
श्रीरामचन्द्रजी, "इस माया को तुम देखोगे और देखने के बाद इसका त्याग करोगे" ऐसा ब्राह्मण से
कहकर भगवान् गन्धर्वनगर के समान अदृश्य हो गये