Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
प्रह्लादो ह्यात्मनैवैनं वरमर्जितवान्स्वयम् ।
स्वत्रं विचारगं कृत्वा स्वयं विदितवान्मनः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वात्मभूत विष्णु से ही प्रह्लाद ने स्वयं इस वर का उपार्जन किया ।
अपने मन को स्वयं ही विचारयुक्त बनाकर अपने आत्मा का उसने स्वयं ज्ञान प्राप्त किया