Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verses 31–32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verses 31–32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
तत्पूजनेन कष्टेन तपसा तस्य राघव ।
काले निर्मलतामेति चित्तं वैराग्यकारिणा ॥ ३१ ॥
नित्याभ्यासविवेकाभ्यां चित्तमाशु प्रसीदति ।
आम्र एव दशामेति साहकारीं शनैः शनैः ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, परमेश्वर के पूजन से, वैराम्यकारी
क्लेशप्रद तपस्या से उसका चित्त बहुत समय में निर्मलता को प्राप्त होता है