Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
यो हि मुख्यं परित्यज्य गौणं समनुधावति ।
त्यक्त्वा रसायनं सिद्धं साध्यं संसाधयत्यसौ ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
जो मुख्य आकार का त्याग कर गौण रूप का अनुसरण करता है वह,
सिद्ध अमृत का त्याग कर साध्य धान आदि को कृषि द्वारा उत्पन्न करता है