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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

यद्यदासाद्यते किंचित्केनचित्क्वचिदेव हि । स्वशक्तिसंप्रवृत्त्या तल्लभ्यते नान्यतः क्वचित् ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं पर किसी के द्वारा जो कुछ भी पाया जाता है वह अपने यत्न से प्रयुक्त शुभाचरण से ही पाया जाता है, दूसरे से कहीं पर भी नहीं