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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

मुख्यः पुरुषयत्नोत्थो विचारः स्वात्मदर्शने । गौणो वरादिको हेतुर्मुख्यहेतुपरो भव ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

"तुम्हे आत्मज्ञानपर्यन्त विचार प्राप्त हो इस प्रकार वर दे रहे भगवान्‌ हरि को पुरुष प्रयत्न से उत्पन्न विचार ही मुख्यरूप से अभिमत है वर मुख्यरूप से अभिमत नहीं । अन्यथा तुम्हें ज्ञान हो, ऐसा ही वरदान देते, इस आशय से कहते हैं। आत्म-साक्षात्कार में पुरुष प्रयत्न से उत्पन्न हुआ विचार मुख्य कारण है, वर आदि गौण हैं, इसलिए तुम मुख्य हेतु में संलग्न होओ