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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

हरिरात्मा हि भूतानां तस्य यत्प्रतिभासते । तत्तथैव भवत्याशु सर्वमात्मैव कारणम् ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि किसी को शंका हो कि श्रोत्रेन्द्रिय के विलीन होने पर शंख ध्वनि का भी ग्रहण नहीं हो सकता, अतः शंख ध्वनिमात्र से कैसे प्रबोध हुआ ? तो उसका परिहार करते हुए कहते है । भगवान्‌ हरि सब प्राणियों के आत्मा हैं उनको जैसा भान होता है वह सब शीघ्र वैसा ही हो जाता है, क्योंकि वे सत्य संकल्प हैं