Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verses 25–26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, verses 25–26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 25,26
संस्कृत श्लोक
पाञ्चजन्यरवं श्रुत्वा य इमे समुपागताः ।
सिद्धाः साध्याः सुरौघास्ते कुर्वन्तु तव मङ्गलम् ॥ २५ ॥
इत्युक्त्वा पुण्डरीकाक्षो दानवं सिंहविष्टरे ।
योजयामास योग्यं तं मेरुश्रृङ्ग इवाम्बुदम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
पौचजन्य शंख की ध्वनि सुनकर जो ये सिद्ध, साध्य ओर
देववृन्द आये हैं वे तुम्हारा मंगल करे | ऐसा कह कर भगवान् मेरु के शिखर पर मेघो के समान योग्य उस
दानव को सिंहासन पर वैठाया