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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verses 22–23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, verses 22–23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 22,23

संस्कृत श्लोक

सायुधं साप्सरोवृन्दं ससुरं सखगाधिपम् । पूजयामास गोविन्दं सत्रैलोक्यमथाग्रगम् ॥ २२ ॥ सबाह्याभ्यन्तरभ्रान्तभुवनं भुवनेश्वरम् । पूजयित्वाथ तिष्ठन्तमुवाच कमलापतिः ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रह्लाद ने अपने शंख, चक्र आदि आयुधों से युक्त, अप्सराओं द्वारा परिवेष्टित, देवताओं से परिवृत, पक्षिराज गरुड से युक्त, उदर के अन्दर स्थित त्रैलोक्य सहित, अपने सामने स्थित भगवान्‌ विष्णु की, जिनके बाहर रोमकूप आदि में ओर भीतर वस्ति, उदर, हृदय आदि में लोक घूम रहे थे, पूजा की | पूजा करके खड़े हुए प्रह्लाद से कहा