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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, Verse 2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

द्वाभ्यां चैवासि पक्षाभ्यामाभ्यां मुक्तो महामते । किं ते मरणमस्तीह किं वा जीवितमस्ति ते ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

हे महामते, इन दोनों (स्थिरता और प्राणोत्क्रमण) पक्षों से तुम मुक्त हो, अतएव यहाँ तुम्हारा क्या मरना है अथवा क्या जीवन है, क्योकि 'अशरीरं शरीरेषु" न तस्य प्राणा उत्क्रामन्त्यत्रैव समवनीयन्ते' ऐसी श्रुतियाँ है