Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 4, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 4, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
भूयोभूयः परामृष्टं हृदये सुनियोजितम् ।
प्रयोजनं फलत्युच्चैर्न हेलाहतसंस्थितेः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, बार-बार विचारा हुआ, मनन द्वारा हृदय में स्थापित
तत्त्वचिन्तन मोक्षरूप प्रयोजन को देता है । किन्तु जिस नराधम ने उपदिष्ट पदार्थ की धारणा अनादर
से नष्ट-भ्रष्ट कर दी उसे मोक्षरूप फल प्राप्त नहीं होता