Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 50
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 50 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
अवस्तुसदृशे वस्तुन्यसक्तं कलनामले ।
येन लीनं कृतं चेतो जीवितं तस्य शोभते ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
जिसने शुक्ति, रजत आदि के सदृश वस्तु
के समान भासमान बाह्मार्थकल्पना रूप मल में अनासक्त चित्त को ब्रह्म में ही लीन कर दिया, उसका
जीवन शोभा देता है