Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
द्वित्रैः सहासुरैर्मुख्यैः परिवारयुतो हरिः ।
प्रविवेशासुरगृहं तारावानिव खं शशी ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
दो या तीन मुख्य-मुख्य असुरो के साथ परिवारयुक्त भगवान् श्रीहरि ने जैसे तारों से
परिवेष्टित चन्द्रमा आकाश में प्रवेश करता हे वैसे ही असुरगृह में प्रवेश किया