Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
रोमराजीलताजालं यस्येमं देहदुर्द्रुमम् ।
अनर्थौघो हरत्युच्चैर्मरणं तस्य राजते ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसके इस देहरूपी दुष्ट वृक्ष को, जिसमें रोमराजीरूपी शाखाओं का समूह है, काम आधि अनर्थरूपी
जोर की आँधी दूर हर ले जाती है, उसका मरना शोभा देता है