Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
यस्य तृष्णाः प्रभञ्जन्ति हृदयं हृतभावनाः ।
प्ररोहमिव गर्धेभ्यो मरणं तस्य राजते ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे मूढ़ पुरुष महान् फल देनेवाले धान के अंकुर आदि को उसे खानेवाले पशु आदि के लिए काट देते
हैं वैसे ही तृष्णाएँ जिसके हृदय को भग्न कर देती हैं, जिन्होंने विवेकरूपी अंकुर को हर लिया, उसका
मरना शोभा देता है