Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verses 37–38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verses 37–38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
पीवराज्ञानयोगेन यस्य पर्याकुलं मनः ।
दुःखानि विनिकृन्तन्ति मरण तस्य राजते ॥ ३७ ॥
कृशोऽतिदुःखी मूढोऽहमेताश्चान्याश्च भावनाः ।
मतिं यस्यावलुम्पन्ति मरणं तस्य राजते ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
तो किसका मरना उचित है, ऐसा प्रश्न होने पर कहते है।
जिसके व्याकुल मन को घन अज्ञान के सम्बन्ध से विविध दुःख छिन्न-भिन्न करते हैं, उसका
मरना शोभा देता है; क्योकि "अत्यन्त पीडतो जीवः स्थूलदेहंविमुंचन्ति“ इस स्मृति से सिद्ध उसके
मरण का हेतु उपपन्न है